Wednesday, December 13, 2006

Jo Beet Gayi So Baat Gayi

This is my one of the favourite most poem by "Harivansh Ray Bachchhan".
Hope u'll enjoy this....


जो बीत गयी सो बात गयी

ज़ीवन मे एक सितारा था , माना वह बेहद प्यारा था,
वो टूट गया सो टूट गया, अम्बर के आनन को देखो,
कितने इसके तारे टूटे, कितने इसके प्यारे छूटे,
जो टूट गये फिर कहाँ मिले, पर बोलो टूटे तारोँ पर,
कब अम्बर शोक मनाता है, जो बीत गयी सो बात गयी

जीवन मे वह था एक कुसुम ,थे उस पर नित्य न्यौछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया, मधुवन की छाती को देखो
सूखी इसकी कितनी कलियाँ , मुर्झाईँ कितनी वल्लरियाँ,
जो सूख गयीँ फिर कहाँ खिलीँ ,पर बोलो सूखे फूलोँ पर ,
कब मधुवन शोर मचाता है, जो बीत गयी सो बात गयी

जीवन मे मधु का प्याला था, तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया, मदिरालय का आँगन देखो,
कितने प्याले हिल जाते हैँ, गिर मिट्टी मे मिल जाते हैँ,
जो गिरते हैँ कब उठते हैँ, पर बोलो टूटे प्यालोँ पर,
कब मदिरालय पछताता है , ज़ो बीत गयी सो बात गयी

मृदु मिट्टी के हैँ बने हुए, मधु घट फूटा ही करते हैँ
लघु जीवन लेकर आए हैँ, प्याले टूटा ही करते हैँ
फिर भी मदिरालय के अन्दर, मधु के घट हैँ, मधु प्याले हैँ ;
जो मादकता के मारे हैँ, वे मधु लूटा ही करते हैँ
वो कच्चा पीने वाला है जिसकी ममता घट प्यालोँ पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ , कब रोता है चिल्लाता है
ज़ो बीत गयी सो बात गयी

Thursday, December 7, 2006

Books

I am really not passionate about any thing. I get bored very easily and pretty fast with almost everything. But 'Books' and 'Music' ( Songs to be precise) are two things that I entertain myself with regularly. A good book gives me lot of food for thought and keeps me occupied.
Will update this blog very shortly.
Till then bye from Abhas.